सोने की असल कीमत से ज्यादा मंहगे होते है गहने, जानिए कैसे ज्वैलर्स कमाते है मुनाफा

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सोने में निवेश हमेशा से ही अच्छा माना जाता है. यही वजह है कि अक्षय तृतीया पर ज्वेलरी की डिमांड बढ़ जाती है. डिमांड बढ़ने से भी ज्वेलरी के कारोबार में भी तेजी देखने को मिलती है. यदि आप भी सोना खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं तो ये समय बहुत अच्छा है, लेकिन एक बात का खास ख्याल रखें. बाजार में मिलने वाली ज्वेलरी के दाम असल में सोने के दाम से ज्यादा हो सकते हैं. यही नहीं ये दाम हर ज्वेलरी की दुकान पर भी अलग-अलग हो सकते हैं.

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ज्वेलर्स लगाते हैं मनमाने मेकिंग चार्ज-

ज्वेलर्स अक्सर बनी हुई ज्वेलरी को बेचते समय कस्टमर्स से बाजार में सोने के दाम के अतिरिक्त दाम भी वसूलते हैं. ये चार्ज मेकिंग चार्ज के रूप में वसूला जाता है. मेकिंग चार्ज कितना होगा ये ज्वेलरी और ज्वेलर्स पर निर्भर करता है. जिस क्वालिटी और ग्राम की ज्वेलरी होगी उसके मुताबिक ज्वेलर मनमाने ढंग से आपसे चार्ज वसूलते हैं. ज्वेलर्स लेबर, वेस्टेज और बनाने में कितने दिन का समय लगा इन सब को जोड़कर मेकिंग चार्ज वसूलते हैं. लेकिन मेकिंग चार्ज पर किसी तरह की कोई छूट नहीं दी जाती.

कब हुई थी मेकिंग चार्ज की शुरुआत-

मेकिंग चार्ज की शुरुआत 2005-06 में हुई थी, जब गोल्ड की कीमत पहली बार 9,000 रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंची थी. तभी से ज्वैलर्स ने मनमाने ढंग से मेकिंग चार्ज भी वसूलना शुरू कर दिया था. तब से अब तक ये सिलसिला चला आ रहा है. जबकि मेकिंग चार्ज को लेकर कोई नियम नहीं है.

बेचने पर काटते हैं मेकिंग चार्ज-

मेकिंग चार्ज कारीगरी के लेवल पर डिपेंड करता है. बेहतर होगा कि इस चीज पर आप ज्यादा पैसे खर्च न करें. अगर आप ज्वेलरी बेचने जाते हैं तो ज्वेलर्स मेकिंग चार्ज काटकर आपको केवल गोल्ड का पैसा देता है. आपको अपनी खरीद वैल्यू का 30 फीसदी तक हिस्सा खोना पड़ सकता है. इसमें से करीब 20 फीसदी मेकिंग चार्ज का होता है. ज्वेलर्स से खरीदारी के वक्त ज्वेलरी की कॉस्ट का ब्रेक-अप मांगिए. इसमें गोल्ड की मौजूदा कॉस्ट, मेकिंग चार्ज, स्टोन की वैल्यू और टैक्स शामिल हैं.

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