जानिए, हाथ की तीसरी उंगली में ही क्यों पहनते हैं सगाई की अंगूठी

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शादी का बंधन हमारे जिंदगी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जिस तरह शादी एक खास पड़ाव होता है वैसे ही शादी से जुड़ी रस्में भी खास होती हैं। शादी एक संस्कार है, जिसमें कई तरह की परंपराओं को निभाया जाता है। विवाह से जुडी ज्यादातर रीति-रिवाज किसी खास मकसद से निभाए जाते हैं। कहने का आशय है हर परंपरा के पीछे कोई न कोई धार्मिक मान्यता होती है। इन्हीं परंपराओ में से एक सगाई भी होती है। यह शादी के पहले निभाई जाने वाली रस्म होती है। सगाई के दौरान लड़का-लड़की एक दूसरे को हाथ की तीसरी उंगली में सोने की अंगूठी पहनाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सगाई की अंगूठी इसी उंगली में क्यों पहनाई जाती है।

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आखिर इसके पीछे क्या कारण हो सकता है?

यह उंगली ज्योतिष के आधार पर अनामिका के नाम से जानी जाती है। ज्योतिशषास्त्र के अनुसार अनामिका में ही सगाई की अंगूठी पहनाने के पीछे कुछ खास धार्मिक मान्याएं होती है। आज हम आपको सगाई की अंगूठी से जुड़ी कुछ धार्मिक मान्यताओं के बारे में बताएंगे।

वैदिक ज्योतिष में अनामिका का संबंध जीवन के क्षेत्रों जैसे प्रसिछिद्ध उत्तेजना, दिखावा और चमक से माना जाता है। यह किसी मनुष्य के व्यक्तित्व में इन गतिविधियों की प्रमुखता दिखाता है। हमारे बाएं हाथ की तीसरी उंगली हमारे विवाहित जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यह उनके प्यार के प्रति व्यक्ति की निष्ठा को दर्शाता है।

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