चंदेली साड़ियो में लगते है सोने के धागे, ‘नजर’ से बचाता है, काला टीका

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प्रयागराज-बच्चों को बुरी नजर से बचाने के लिए काजल का टीका लगाने की परंपरा सदियों पुरानी है। दूल्हे को नजर न लगे, इसलिए उसे भी काला टीका लगाया जाता है पर क्या आप जानते हैं कि काजल का ऐसा ही टीका लगता है चंदेरी साड़ियों पर भी। जी हां, ऐसा ही है। चंदेरी साड़ियों में हर एक मीटर की दूरी पर काला टीका लगाते हैं कारीगर।

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हथकरघा विभाग की तरफ से एकेडेमी में लगाई गई प्रदर्शनी

मध्य प्रदेश सरकार के हस्तशिल्प एवं हथकरघा विभाग की तरफ से एकेडेमी में लगाई गई प्रदर्शनी में इतिहास में ले जाती है। मध्य प्रदेश के अशोक नगर जिले में चंदेरी गांव है। यहां घर-घर में बुनकर रहते हैं। धागों को खूबसूरती से बुनकर चंदेरी साड़ी की शक्ल देना इनका पुश्तैनी काम है। कभी राजघरानों तक सीमित रही चंदेरी साड़ियां आज 35 सौ से लेकर 1,17,500 रुपये तक की कीमत में हैं।

इन साडियों का वजन होता है मात्र सौ ग्राम

एक लाख रुपये से अधिक कीमती साड़ियों में सोने के धागे से डिजाइन बनाई जाती है। वजन होता है मात्र सौ ग्राम। हस्तशिल्प एवं हथकरघा विभाग के क्षेत्रीय प्रबंधक एमएल शर्मा बताते हैं कि चंदेरी साड़ी कला को सहेजने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने 98 करोड़ की लागत से हैंडलूम पार्क बनवाया है।

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