आप भी जाने कैसे तय होती है सोने के अंतर्राष्ट्रीय भाव

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आप भी जाने कैसे तय होती है सोने के अंतर्राष्ट्रीय भाव

नई दिल्ली — ये बात तो हम सबको पता है कि दुनिया की सबसे बहुमूल्य धातु सोना है |त्योहारी सीजन में तो जैसे सोने के दामो में आग ही लग जाती है |ऐसे मौकों पर सोने के सिक्के, आभूषण और मूर्तियों की मांग में जबरदस्त उछाल आ जाता है। लेकिन क्या आप ने कभी यह सोचने की कोशिश की है कि आखिर सोने की कीमतें तय कैसे होतीं हैं |इसे कौन तय करता है साथ ही अलग-अलग राज्य और देश में इसकी कीमत अलग क्यों होती है। चलिए समझते है इस पूरे प्रकरण को थोडा विस्तार से |सोने की कीमते बहुत अधिक हद तक मांग और आपूर्ति के हिसाब से रोज बदलती है यानी जब मांग तेज होती है और आपूर्ति कम होती है तब इसके दाम उछल जाते हैं और इसके अलावा भी सोने की कीमतें तय करने के लिए एक प्रशासनिक इकाई होती है जो कि अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय नीति पर काम करती है।

Live MCX

साल 2015 के पहले लंदन गोल्ड फिक्स सोने की नियामक इकाई थी फिर साल 2015 के बाद एक नई इकाई का गठन हुआ जिसका नाम लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (LBMA)है और इसे ICE प्रशासनिक बेंच मार्क चलाता है।यह संगठन पूरी दुनिया के देशों की सरकारों मिलकर संयुक्त रुप से यह तय करता है कि सोने की कीमत क्या होनी चाहिए।वहीं भारत में सोने के भाव मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज(MCX) लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (LBMA) के साथ देश के रोज़ के सोने की डिमांड और सप्लाई के आंकड़ों को जुटाकर और ग्लोबल मार्केट में मुद्रास्फीति की स्थिति को ध्यान में रखकर तय करता है |इन सबके अलावा भारत में सोने की कीमतें और 2 तरीके से तय होती हैं। फ्यूचर मार्केट (वायदा बाजार) औऱ स्पॉट प्राइस (हाजिर सर्राफा) दोनों में कीमतें अलग-अलग होती हैं। आम ग्राहक का स्पॉट प्राइस(हाजिर सर्राफा) से सोने की खरीददारी करता है। वहीँ कारोबारी और व्यापारी फ्यूचर प्राइस (वायदा बाजार) से सोने की खरीदारी करते है |यहीं पर सोने में सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। करेंसी रेट का भी सोने की कीमतों पर बड़ा असर पड़ता है। भारत जैसे देश में यह असर और भी ज्यादा हो जाता है क्योंकि भारत सोना आयात करता है ऐसे में डॉलर और रुपए के मूल्य में उतार-चढ़ाव सोने के दाम पर असर डालता है।

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